कल सवेरे पहला इम्तिहान है। हफ्ते भर से जिन फ़ोटोकॉपी वाले, मेल वाले और जाने कहाँ-कहाँ वाले नोट्स का वेद-पाठ चल रहा है, उसका मंचन कल होगा, सवेरे 10 बजे।
इस पिछले एक हफ्ते कैंपस के हालात ऐसे रहे हैं कि किसी चलते-फिरते आदमी ने भी अगर किसी किताब से दबे, लाइब्रेरी से डरते, लेकिन फिर भी वहां 7 बजे तक जान खपाते, थके हुए साथी के कंधे थपथपा कर उससे कह दिया कि, "सुन JNU के रस्ते में कुछ नोट्स मिले थे, काफ़ी शार्ट में काफी कवर किया हुआ है!" तो वो नोट्स लेने भी कोई दौड़ जाये।
कॉफ़ी-चाय के परनाले बह रहे हैं। कोई विशेष गुणीजन अगर दोनों का परहेज़ रखते हैं तो वो भी जागने के लिए कुछ न कुछ इंतज़ाम बनाये हैं। सुना कुछ ने तो किताब को लफ्ज़-ब-लफ्ज़ ज़हन के शीशे में उतार लिया है।
इन्हीं इम्तिहानों के बहाने कितनों की सेहत बन रही है। कोई चल-चल के पढ़ रहा है, तो कोई चल के ऐसी जगह जा रहा है, जहाँ पढ़ा जा सके। कोई वक़्त पे खाना खा रहा है तो कोई पानी ज़्यादा पी रहा है।
कलम और पेंसिल की भी खूब बिकवाली दिखी साहब। सारा सेमिस्टर जो लोग एक रजिस्टर को आधा भी न भर पाये थे, उन्होंने 4-4 कलम एक साथ खरीदे हैं। कंप्यूटर और टाइपिंग के इस ज़माने में कलम भी दुकानों के आलों से झांकते इम्तहानों का ही इंतज़ार करते हैं अब। कलम की ताकत दरअसल कीबोर्ड खा गए हैं। कलम तो अब दूर की वो मौसी है जिसके यहाँ जाने के बहाने माशूका से मुलाकात होती है।
मंदिर-मिन्नतों की आवाज़ें भी सुन जाती हैं। भगवान भरोसे तो खैर हर इम्तिहान होता है, ये हो या कोई और। भगवान् का अपना कट सेफ है।
अजीब है, मज़ा भी आ रहा है। नहीं, इसका ये कतई मतलब नहीं कि मेरी पूरी तैयारी हो गयी। किसी भी इम्तिहान की कोई तैयारी कभी पूरी नहीं होती। ज़िन्दगी कितना भी मौका दे ले, इंसान इम्तिहान में दिल में एक धुकधुकी लिये ही बैठता है।
यहाँ भी हर दिल में वही धुकधुकी है। चेहरों पे डर है चिंता भी है... चिंता रिजल्ट से ज़्यादा उसके असर की है... दोस्त क्या कहेंगे, घरवाले, भैया दीदी जो सब हमको तीस मारखां समझते हैं, सबके सामने कहीं फालूदा न हो जाये...
ये सारे डर, चिंता और धुकधुकी नाचीज़ में भी विद्यमान हैं लेकिन सही बताएं न हम सूरज को उगने से रोक सकते हैं और न ही इस वक़्त कोई बड़ा तीर छोड़ सकते हैं।
तो हम मज़े में हैं। अजीब है पर मज़ा आ रहा है।
आप दुआ में याद रखियेगा, हम ज़रा कुछ किताबें देख लें। लेकिन आप दुआ में हमें ज़रूर याद रखियेगा... वो क्या है आपके कहने से भगवान् पे ज़रा प्रेशर बढ़िया बनेगा।
😊
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